
तेज बुखार के लिए आयुर्वेदिक इलाज के तरीके हम इस आर्टिकल में दे रहे है
तेज बुखार को जड़ से ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक इलाज अपनाएं। जानिए तुलसी, गिलोय, सौंठ जैसे घरेलू नुस्खों और प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधियों से तेज बुखार में राहत पाने के प्राकृतिक उपाय।
तेज बुखार एक सामान्य लेकिन गंभीर लक्षण है जो शरीर में संक्रमण या अंदरूनी गड़बड़ी का संकेत देता है। आयुर्वेद के अनुसार, बुखार (ज्वर) वात, पित्त और कफ दोषों के असंतुलन के कारण होता है। इस लेख में हम आपको तेज बुखार के लिए आयुर्वेदिक इलाज के सरल, घरेलू और प्रभावी उपाय बताएंगे जो बिना साइड इफेक्ट्स के आपको आराम दे सकते हैं।

वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण
पेट के कीड़े या पाचन गड़बड़ी
तापमान में अचानक बदलाव
इम्यून सिस्टम की कमजोरी
शरीर में सूजन या चोट
- आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से बुखार
आयुर्वेद में बुखार को “ज्वर” कहा जाता है और इसे शरीर के तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के असंतुलन से जोड़ा जाता है। पित्तज ज्वर आमतौर पर तेज बुखार का कारण होता है, जिसमें शरीर गर्म और पसीने से भरा रहता है।
- तेज बुखार के लिए आयुर्वेदिक इलाज
a) तुलसी का काढ़ा
सामग्री: तुलसी के पत्ते, अदरक, काली मिर्च
विधि: इन सभी को उबालकर छान लें और गर्मागरम सेवन करें।
फायदा: यह इम्यूनिटी बढ़ाता है और शरीर का तापमान कम करता है।
b) गिलोय का रस
उपयोग: सुबह-शाम 2-3 चम्मच गिलोय रस सेवन करें।
फायदा: गिलोय में एंटीवायरल और एंटीपायरेटिक गुण होते हैं।
c) सौंठ और गुड़ का सेवन
विधि: एक चम्मच सौंठ पाउडर में थोड़ा गुड़ मिलाकर दिन में दो बार खाएं।
फायदा: पाचन सुधरता है और शरीर का तापमान नियंत्रित होता है।
d) धनिया बीज का पानी
विधि: रातभर एक चम्मच धनिया बीज भिगो दें, सुबह उबालें और पी लें।
फायदा: पित्त संतुलन में मदद करता है और बुखार को कम करता है।
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- तेज बुखार के लिए विशेष आयुर्वेदिक योग
महा सुदर्शन चूर्ण: यह कड़वा होता है लेकिन बुखार में बहुत असरकारक है।
त्रिभुवन कीर्ति रस: पुराने बुखार के लिए उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि।
संजीवनी वटी: विषज्वर (टायफाइड आदि) में उपयोगी।
- घरेलू नुस्खे और दिनचर्या
गुनगुना पानी पिएं
हल्का, सुपाच्य भोजन लें
ठंडे पानी की पट्टी रखें
दिन में कम से कम 8 घंटे आराम करें
- तेज बुखार में क्या न करें?
ठंडा पानी न पिएं
दूध और भारी चीजें न लें
बेमतलब दवाइयों से बचें
तेज धूप या बारिश में न निकलें
- बच्चों में तेज बुखार के लिए आयुर्वेदिक इलाज
तुलसी और शहद मिलाकर दें
गिलोय रस की थोड़ी मात्रा दें (डॉक्टर से सलाह लेकर)
नाभि पर ठंडी पट्टी रखें
- बुजुर्गों में बुखार और उसका आयुर्वेदिक समाधान
गुनगुना पानी + गिलोय + सौंठ + शहद
अश्वगंधा और शतावरी का उपयोग इम्यून सिस्टम के लिए

निष्कर्ष:
तेज बुखार का समय पर और सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है। आयुर्वेदिक उपचार ना केवल सुरक्षित होते हैं बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाते हैं। ऊपर दिए गए उपायों को अपनाकर आप तेज बुखार के लिए आयुर्वेदिक इलाज को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
- तेज बुखार के दौरान आयुर्वेदिक डाइट प्लान
तेज बुखार के समय शरीर की पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर हो जाती है, इसलिए आयुर्वेद में इस समय ऐसी चीजें खाने की सलाह दी जाती है जो हल्की, सुपाच्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली हों।
सुबह का समय:
गुनगुने पानी के साथ दो चम्मच गिलोय रस लें।
मूंग की पतली खिचड़ी या सब्ज़ी का सूप लें।
दोपहर का भोजन:
हल्की पकी हुई मूंग की दाल, लौकी या तुरई की सब्ज़ी और थोड़ा चावल लें।
खाने के बाद सौंफ-धनिया का काढ़ा पी सकते हैं, जो पाचन में मदद करेगा।
शाम के समय:
तुलसी-अदरक वाली हर्बल चाय लें।
अगर भूख लगे तो भुनी हुई अजवाइन और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
रात का भोजन:
एक कटोरी दलिया या पतली खिचड़ी लें।
सोने से पहले एक गिलास गुनगुना पानी जरूर पिएं।
परहेज करें:
तले हुए, मसालेदार या खट्टी चीजों से दूर रहें।
ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक आदि का सेवन न करें।

- तेज बुखार से बचाव के लिए आयुर्वेदिक सुझाव
बुखार से बचना उसके इलाज से बेहतर है। आयुर्वेदिक दिनचर्या और ऋतुचर्या के अनुसार चलकर हम खुद को मजबूत बना सकते हैं।
दिनचर्या में सुधार करें: सुबह जल्दी उठें, योग और प्राणायाम करें।
त्रिफला का सेवन: रात को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण गर्म पानी के साथ लें। यह शरीर को डिटॉक्स करता है।
सीजनल डिटॉक्स करें: हर 3-6 महीने में पंचकर्म या घर पर हल्का उपवास करके शरीर को साफ करें।
काढ़ा को आदत बनाएं: मौसम बदलते समय सप्ताह में दो-तीन बार तुलसी, अदरक, काली मिर्च और दालचीनी वाला काढ़ा लें।
नींद पूरी लें: हर दिन कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी से इम्युनिटी कमजोर होती है।
- आयुर्वेद में वर्णित तेज बुखार से जुड़ी जड़ी-बूटियाँ
- गिलोय (Tinospora cordifolia)
बुखार में अमृत के समान मानी जाती है। यह पित्त और वात दोनों को संतुलित करती है। - तुलसी (Ocimum sanctum)
इसमें एंटीबायोटिक, एंटीवायरल और इम्युनोमॉड्युलेटरी गुण होते हैं। - नागरमोथा (Cyperus rotundus)
पाचन तंत्र को सुधारे और शरीर का तापमान नियंत्रित करे। - शुनाठी (Kalmegh)
पित्तज ज्वर में अत्यंत उपयोगी। यह यकृत को मजबूत करती है। - पिप्पली (लंबी काली मिर्च)
यह ज्वर के साथ आने वाली थकावट को दूर करने में सहायक है।
- रोग के बाद रिकवरी के लिए आयुर्वेदिक देखभाल
तेज बुखार के बाद शरीर कमजोर हो जाता है। इस समय सही देखभाल जरूरी है ताकि दुबारा बुखार न आए।
अश्वगंधा का सेवन करें – यह बलवर्धक है और मांसपेशियों को मजबूती देता है।
शतावरी या सफेद मुसली दूध में मिलाकर लें – यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
नारियल पानी और फल जैसे पपीता, सेब और अनार लें – यह शरीर में ऊर्जा पुनर्स्थापित करते हैं।
धीमे-धीमे सामान्य आहार शुरू करें और बाहर के खाने से परहेज़ करें।
यदि आप ऊपर बताए गए सभी उपायों को नियमित रूप से अपनाते हैं, तो तेज बुखार के लिए आयुर्वेदिक इलाज न सिर्फ राहत देगा बल्कि भविष्य में बुखार से बचाव भी करेगा। हमेशा याद रखें कि प्रकृति में हर रोग का समाधान छुपा है – ज़रूरत है तो बस सही जानकारी और धैर्य के साथ उस उपाय को अपनाने की।
